एक शिक्षक ने अपनी सैलरी से स्टूडेंट्स के लिए बना दिया मॉडल स्कूल

ऐसा कहा जाता है की एक टीचर अपने शिष्यों का भविष्य संवारने के लिए खुद भी बलिदान देता रहा है. आज के आधुनिक युग में अरविंद कुमार जैसे टीचर उस परंपरा को एक नया आयाम दे रहे हैं. गौतमबुद्ध नगर जिले के तुगलपुर गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले अरविंद 4 साल में जर्जर हालत में चल रहे स्कूल को पूरी तरह बदल डाला है.हम से से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि वो अब तक अपनी सैलरी से करीब डेढ़ से 2 लाख रुपए स्कूल को संवारने में लगा चुके हैं, इसके अलावा दूसरे शिक्षकों और बाहरी संस्थाओं से मदद लेकर जर्जर हालत में चल रहे स्कूल को एक आदर्श स्कूल बना दिया है.


आज इस स्कूल में वो सब सुविधाएं हैं जोकि एक मॉडल स्कूल में होनी चाहिए. इसका नतीजा ये है कि चार साल पहले जहां स्कूल में 100 बच्चे भी नहीं थे, आज इस उच्च प्राथमिक विद्यालय में 6,7 और 8वीं कक्षा में कुल 326 स्टूडेंट्स हैं. स्कूल में छात्रों के लिए एक कंप्यूटर, प्रिंटर और 6 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं जो अरविंद कुमार ने अपने खर्च से लगवाए है इसके अलावा स्कूल में बेंच, पानी के लिए आर ओ, वॉटर कूलर, कमरों में पंखे ये सब उन्होंने बाहरी योगदानों से लगवाया है. अरविंद कुमार का कहना है कि उन्होंने अपने स्कूल के लिए सबसे मदद मांगी, तब जाकर स्कूल का कायाकल्प हो सका है. यहीं नहीं क्वालिटी एजुकेशन के लिए स्कूल में एक कंप्यूटर और एक प्रिंटर भी लगाया गया है, जिसके माध्यम से वह बच्चों को तकनीकी (आधुनिक) दुनिया से जोड़ा जा रहा है.

उनके प्रयासों का ही नतीजा है कि बेसिक शिक्षा अधिकारी बाल मुकुंद प्रसाद ने भी पिछले साल स्कूल के लिए बिजली इन्वर्टर उपलब्ध कराया. अरविंद कुमार कहते हैं कि मैंने शुरुआत भले ही अकेले की हो लेकिन सभी शिक्षकों ने पूरे मन से इसमें सहयोग किया है, जब पंखों की बात आयी थी तो सभी आगे आए और स्कूल में अपने आर्थिक योगदान से पंखे लगवा दिए. इसी तरह दूसरे खर्चों में भी सभी साथ आए.

पढ़ाने में भी पीछे नहीं अरविंद कुमार

अंग्रेजी और विज्ञान के शिक्षक अरविंद कुमार को उनके छात्र छात्राएं आदर्श टीचर मानते हैं. स्कूल के एक बच्चे ने बताया कि सर, गर्मियों की छुट्टियों में 8वीं पास करने वाले बच्चों को आगे की क्लास की पढ़ाई के लिए नि शुल्क शिक्षा प्रदान करते हैं. इसके साथ ही वह छात्रों को लेकर कई ऐतिहासिक इमारतों के शैक्षिक भ्रमण के लिए भी ले जा चुके हैं.

इस साल के लिए उन्होंने शिक्षा विभाग से स्कूल के बाद बच्चों को पढ़ाने की अपील की है. अरविंद बताते हैं कि वह महज 15 साल की उम्र से शिक्षा के क्षेत्र में है पहले घर में ही पढ़ाया करते थे. उसके बाद नौकरी लग गई तो सरकारी स्कूल में करीब 25 सालों से शिक्षक हैं. उनके द्वारा पढ़ाए हुए कई स्टूडेंट आज डॉक्टर, इंजीनियर और शिक्षक के पद पर हैं. अपने स्टूडेंट्स को आगे बढ़ते देखकर ही मुझे सुकून मिल जाता है और एक टीचर को इसी सुकून की चाहत भी होती है
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