69000 शिक्षक भर्ती मामले में 22 Oct की सुनवाई का पॉइंट टू पॉइंट विस्तृत सार पढ़े

आज कोर्ट नियत समय पर जैसे ही बैठी अनिल तिवारी सर डायस पर आए और जज से वार्तालाप कर वापस बैठ गए । इस बीच मे दो डेली केसेज सुने गए फिर पुनः अपना केस स्टार्ट हुआ

अनिल तिवारी साहब ने अपने बहस मे 68500 व 69000 को तर्कपूर्ण तरीके अलग अलग सिद्ध करते हुए सिंगल बेंच के ऑर्डर 40/45 & जीरो को विधि के विपरीत बताया। उन्होंने यह पॉइंट रखा कि 40-45 कि प्रेयर ही विपक्ष के द्वारा रिट में नहीं कि गयी थी तो कोर्ट कैसे उसे रख सकती है जबकि सिंगल बेंच लॉ मेकिंग अथॉरिटी नहीं है नियमत: यह सरकार या विभाग का कार्य है और रूल मेकिंग पावर DB या SC के पावर में है। दूसरा 68500 के जियो में साफ साफ लिखा है कि 40-45 कटऑफ सिर्फ इसी भर्ती के लिए है। आगे तिवारी सर ने कहा 0 पासिंग मार्क हो ही नहीं सकता क्योंकि आप किसी भी एग्जाम में बिना कटऑफ या पासिंग मार्क के किसी को उत्तीर्ण कैसे घोषित करोगे? 69000 के जियो में इसका उल्लेख भी है कि पास कैंडीडेट की लिस्ट वेबसाइट पे डाली जाएगी।
69000 शिक्षक भर्ती मामले में 22 Oct की सुनवाई
इस पर जज इरशाद अली जी ने प्रश्न किया : ठीक हैै जब स्टेट भर्ती केे सभी मानकों जैसे परीक्षा पैटर्न एग्जाम टाइम आदि में परिवर्तन कर रही थी तो पासिंग मार्क में परिवर्तन कर क्यो नही डिसाइड किया गया?

तो अनिल तिवारी ने बहुत ही सटीकता से जवाब दिया कि: यह स्टेट कि पावर में आता है जैसा कि नियमावली में लिखा है कि टाइम टाइम पर वह पासिंग मार्क घोषित करेगा । उसमें यह नहीं लिखा है कि पासिंग मार्क पहले या बाद में लगेगा या कब लगेगा। इसी पावर से उसने 68500 पहले लगाया था । अब जब कि यह दूसरी भर्ती है जिसमें सभी चीजें अलग है तो वह उसी पावर से बाद में लगाया गया तो क्या गलत है नियम के अनुसार ही लगाया गया है। फिर तिवारी सर ने कहा कि हर भर्ती की प्रक्रिया और तत्कालीन स्थिति अलग होती है। जैसा कि 68500 में 40-45 कटऑफ रखी गयी वहाँ स्थिति अलग थी केवल बीटीसी और SM थे और इस कटऑफ पर भी 40% सीटें रिक्त रह गयी थी जिसमे इन सभी SM ने प्रतिभाग किया था और फेल हो गये और अब वही कटऑफ लगाने की मांग कर रहे हैं। आगे अनिल तिवारी सर ने बड़ी चतुराई से हँसते हुए इरशाद अली सर का नाम लेते हुए कहा कि आपसे बेहतर ये कौन जानेगा यह केस भी आपके पास आया था और आपने गुडवत्ता और नियम चेंज न हो के अनुरूप ही 30-33% न करके 40-45% पर फैसला दिया था। जबकि इस केस की स्थिति बिल्कुल अलग है यहां नियम के अनुसार ही नियम रखा जा रहा है। न कि किसी पुराने नियम को बदला जा रहा है। अब यदि स्टेट ने 68500 की भर्ती के स्थिति जहाँ 40% सीटें खाली रह गयी थी को देखते हुए कटऑफ बाद में लगाने का निर्णय लिया तो क्या गलत है। जो कि नियम पासिंग मार्क समय समय पर सरकार लगा सकती है को पूरी तरह फॉलो करता है।
जज इससे सहमत दिखे।

जज के आश्वस्थ होने के बाद तिवारी सर आगे " मिनिमम" को परिभाषित किया। कि किसी स्केल पे मिनिमम 0 और मैक्सिमम 100 है। सफल अभ्यर्थी घोषित करने के लिए 0 हो नहीं सकता। और 0 और 100 के बीच कोई न कोई संख्या निर्धारित की जा सकती है। और पासिंग मार्क निर्धारित करना एक्सपर्ट का काम है क्योंकि वो सभी स्थितियों और समस्याओं से अवगत होते हैं, SC के अनुसार इसमें कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकती। फिर इस सम्बंध में कोर्ट में कई ऑर्डर तिवारी सर ने रक्खी। जिसे कोर्ट ने कई बार नोट डाउन किया।

आगे क्वालिटी एजुकेशन पे बोलते हुए सर ने कुछ दिन पूर्व प्रकाशित up के एजुकेशन में रैंकिग वाली रिपोर्ट भी सबमिट की। आगे सिंगल बेंच के ऑर्डर में जज द्वारा मेंशन की गई कई बातों को आधार बनाकर ये सिद्ध किया कि इस फैसले में जज साहब का शिक्षा मित्रों के प्रति इमोशनल टच साफ दिख रहा है यह बातें कोर्ट ने नोट भी की और जज सहमत दिखे।

इरशाद अली जी के सभी प्रश्नों का तिवारी जी ने बहुत ही सटीकता से जवाब दिया कहीं भी वे असहज नजर नहीं आये। SM ग्रुप के लोगों द्वारा उड़ाई जा रही पोस्ट बिल्कुल बकवास है की तिवारी जी स्तब्ध हो गए जवाब नहीं दे पाए। इसमें सबसे अच्छी बात ये रही कि जज साहब ने कई बार इन पाइंट को नोट किया।और जज साहब जिस तरह से प्रश्न कर रहे थे उससे यह बिल्कुल साफ है उन्हें अब पूरा केस समझ में आ चुका है जो हमारे लिए बहुत ही अच्छी बात है।

आगे तिवारी सर ने बीएड का बचाव करते हुए कहा कि बीएड को NCTE की गाइडलाइन के अनुरूप ही स्टेट ने शामिल किया है और SM की तुलना में बीएड जैसी स्पेशल डिग्री होने के बावजूद इन्हें कोई अतिरिक्त वेटेज देकर शामिल नहीं किया गया तो कैसे ये कह सकते हैं कि भेदभाव करके SM के विरुद्ध इन्हें शामिल किया गया है।जिसका इन्होंने एग्जाम होने तक कोई विरोध भी नहीं किया है।

इस बीच इरशाद जी ने ये प्रश्न किया कि: अधिक संख्या और परीक्षा पैटर्न और समय बदलने से कैसे 40-45% से 60-65% किया जा सकता है।

इस पर तिवारी जी ने RTE एक्ट क्वालिटी की बात समझाते हुए। परीक्षा पैटर्न पर बहुत ही सार्थक तरीके से बताया गया कि यहां कोई निगेटिव मार्किंग नहीं है जिससे तुक्का मारने पर भी किस प्रकार अभ्यथियों को लाभ होगा जबकि लघु उत्तरीय परीक्षा में ऐसा होने की कोई संभावना नहीं है।जज ने निगेटिव मार्किंग न होने के पाइंट को भी नोट किया।

कुल मिलाकर तिवारी जी ने आज बहुत अच्छी और लंबी बहस की कोर्ट दो बार उठने को आयी लेकिन उन्होंने अतिरिक्त समय लेकर अपनी बात को पूरा किया।
अंत मे तिवारी सर ने यह बात कहकर अपनी बात पूरी की:

यदि पुरानी परीक्षा प्रणाली पर ही परीक्षा होती और 40-45 से बढ़ाकर 60-65 कट ऑफ रखी जाती तो भेदभाव पूर्ण होता जबकि यहाँ सभी परिस्थितियां अलग हैं। 40-45 और 0 पासिंग मार्क ऑर्डर किसी भी तरह विधिसम्मत नहीं है।